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सुनो कहानी

कछुआ और खरगोश
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यह कहानी जो हम बचपन आए सुनते आ रहे हैं।
मैनेजमेंट कॉलेज में इसे कैसे सुनाया जाता है , देखिए, पढ़िए।
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एक बार खरगोश को अपनी तेज चाल पर घमंड हो गया और वो जो मिलता उसे दौड़ लगाने के लिए चुनौती देता।
कछुए ने उसकी चुनौती स्वीकार कर ली।
और फिर....

दौड़ आरम्भ हुई।

खरगोश तेजी से भागा और काफी आगे जाने पर पीछे मुड़ कर देखा, कछुआ कहीं आता नज़र नहीं आया, उसने मन ही मन सोचा कछुए को तो यहाँ तक आने में बहुत समय लगेगा, चलो थोड़ी देर आराम कर लेते हैं, और वह एक पेड़ के नीचे लेट गया। लेटे-लेटे  कब उसकी आँख लग गयी पता ही नहीं चला।

उधर कछुआ धीरे-धीरे मगर लगातार चलता रहा। बहुत देर बाद जब खरगोश की आँख खुली तो कछुआ गंतव्य तक पहुँचने वाला था। खरगोश तेजी से भागा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कछुआ जीत गया था।

Moral of the story:
Slow and steady wins the race.
धीमा और लगातार चलने वाला ही जीतता है।

ये कहानी तो हम सब जानते हैं, अब आगे की कहानी देखते हैं:

रेस हारने के बाद खरगोश निराश हो गया,
उसने अपनी हार पर चिंतन किया और उसे समझ आया है कि वो अति आत्मविश्वास के कारण हार गया…
उसे अपनी मंजिल तक पहुँच कर ही रुकना चाहिए था।

अगले दिन उसने फिर से कछुए को दौड़ की चुनौती दी।

 कछुआ पहली रेस जीत कर आत्मविश्वाश से भरा था और तुरंत मान गया।

दौड़ फिर हुई,
इस बार खरगोश बिना रुके अंत तक दौड़ता गया और उसने बड़ी आसानी से कछुए को एक बहुत बड़े अंतर से हरा दिया।

Moral of the story:
Fast and consistent will always beat the slow and steady.
तेज और लगातार चलने वाला धीमे और लगातार चलने वाले से हमेशा जीत जाता है।

यानि slow and steady होना अच्छा है लेकिन fast and consistent  होना और भी अच्छा है।

For example, अगर किसी ऑफिस में इन दो टाइप्स के लोग हैं तो वे ज्यादा तेजी से आगे बढ़ते हैं जो fast भी हैं और अपने फील्ड में consistent भी हैं।

पर पिक्चर (मेरा मतलब कहानी ) अभी बाकी है मेरे दोस्त….

इस बार कछुआ कुछ सोच-विचार करता है और उसे ये बात समझ आती है कि जिस तरह से अभी रेस हो रही है वो कभी-भी इसे जीत नहीं सकता।

वो एक बार फिर खरगोश को एक नयी रेस के लिए चैलेंज करता है, पर इस बार वो रेस का रूट अपने मुताबिक रखने को कहता है। खरगोश तैयार हो जाता है।

रेस शुरू होती है।
खरगोश तेजी से तय स्थान की और भागता है, पर उस रास्ते में एक तेज धार नदी बह रही होती है, बेचारे खरगोश को वहीँ रुकना पड़ता है। कछुआ धीरे-धीरे चलता हुआ वहां पहुँचता है, आराम से नदी पार करता है और लक्ष्य तक पहुँच कर रेस जीत जाता है।

Moral of the story:
Know your core competencies and work accordingly to succeed.
पहले अपनी strengths को जानो और उसके मुताबिक काम करो जीत ज़रुर मिलेगी।

For Ex: अगर आप एक अच्छे वक्ता हैं तो आपको आगे बढ़कर ऐसे अवसरों को लेना चाहिए जहाँ public speaking का मौका मिले। ऐसा करके आप अपनी organization में तेजी से ग्रो कर सकते हैं।

लेकिन कहानी अभी भी पूरी नही हुई है जनाब....

इतनी रेस करने के बाद अब कछुआ और खरगोश अच्छे  दोस्त बन गए ।वे एक दुसरे की ताकत और कमजोरी समझने लगे थे। दोनों ने मिलकर विचार किया कि अगर हम एक दुसरे का साथ दें तो कोई भी रेस आसानी से जीत सकते हैं।

इसलिए दोनों ने एक आखिरी रेस एक बार फिर से मिलकर दौड़ने का फैसला किया,
पर.....
इस बार as a competitor नहीं
बल्कि as a team काम करने का निश्चय लिया।

दोनों स्टार्टिंग लाइन पे खड़े हो गए….
get set go….
और तुरंत ही खरगोश ने कछुए को ऊपर उठा लिया और तेजी से दौड़ने लगा।
दोनों जल्द ही नदी के किनारे पहुँच गए।
अब कछुए की बारी थी, कछुए ने खरगोश को अपनी पीठ बैठाया और दोनों आराम से नदी पार कर गए।
अब एक बार फिर खरगोश कछुए को उठा फिनिशिंग लाइन की ओर दौड़ पड़ा और दोनों ने साथ मिलकर रिकॉर्ड टाइम में रेस पूरी कर ली।
दोनों बहुत ही खुश और संतुष्ट थे, आज से पहले कोई रेस जीत कर उन्हें इतनी ख़ुशी नहीं मिली थी।

Moral of the story:
Team Work is always better than individual performance.
टीमवर्क हमेशा व्यक्तिगत प्रदर्शन से बेहतर होता है।

Individually चाहे आप जितने बड़े performer हों लेकिन अकेले दम पर हर मैच नहीं जिता सकते।

अगर लगातार जीतना है तो आपको टीम में काम करना सीखना होगा,
आपको अपनी काबिलियत के आलावा दूसरों की ताकत को भी समझना होगा। और जब जैसी situation हो, उसके हिसाब से टीम की strengths को use करना होगा।

यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है। खरगोश और कछुआ दोनों ही अपनी हार के बाद निराश हो कर बैठ नहीं गए,

बल्कि उन्होंने स्थिति को समझने की कोशिश की और अपने आप को नयी चुनौती के लिए तैयार किया। जहाँ खरगोश ने अपनी हार के बाद और अधिक मेहनत की वहीँ कछुए ने अपनी हार को जीत में बदलने के लिए अपनी strategy में बदलाव किया।

जब कभी आप फेल हों तो या तो अधिक मेहनत करें या अपनी रणनीति में बदलाव लाएं या दोनों ही करें, पर कभी भी हार को आखिरी मान कर निराश न हों…बड़ी से बड़ी हार के बाद भी जीत हासिल की जा सकती है!

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